हमारी अधूरी कहानी । hindi story

ये बात है 2014 की जब मैं लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करता था , मेरा नाम शैरोज़ है और मैं एक mmbs डॉक्टर हूं, ये बात उन दिनों की है जब मेरी छुट्टियां चल रही थीं इस वजह से में घर पर आया हुआ था, मेरे घर से कुछ दी दूरी पर मेरे एक दूर के रिश्तेदा रहते थे लेकिन हमारा आना जाना अच्छा था उनके घर से, यूं समझें कि बहुत लगाव था हमारा वहां से तो नॉर्मली में पहले जिस तरह उनके घर जाता था उस दिन भी गया, लेकिन ये दिन सब दिनों जैसा नहीं था मेरे लिए मैं ये बात नहीं जानता था, उनके घर एक लड़की आई हुई थी जैसे ही मैं अंदर गया मेरी नज़र पड़ी उस पर और हम दोनों ने शर्म से अपनी नज़रें बचा लीं, और वो सलाम करती हुई कमरे में चली गई, लेकिन मेरी निगाहों से उसका चेहरा नहीं हट रहा था ।

हमारी अधूरी कहानी । hindi story

हमारी अधूरी कहानी । hindi story 


अब लेकिन में एक दम से किसी से कुछ पूछ भी नहीं सकता था कि वो कौन है मेरी हिम्मत न हुई, लेकिन दिल है कि बस ज़िद्द पर था जानने के लिए वो कौन है कहां से आई है क्या रिश्ता है उसका इन के साथ, लगभग आधे आधे घंटे के बाद उनके लड़के (जो कि मेरा दोस्त था) से पूछा कि वो कौन है उसने बताया कि उसकी फ़ुप्पो (बुआ) की लड़की है इतना सुनने के बाद में उससे आगे फिर कुछ न पूछ सका । बहुत प्यारी और खूबसूरत लड़की थी वो, मैंने कुछ देर बाद ग़ौर किया कि बड़ी धीमी आवाज़ में बात करने वाली और इतनी मीठी आवाज़ के बस सुनते रहो ऐसा मन कर रहा था।


बात कैसे हो ? अब मैं बस इस सोच में था कि किसी तरह उससे बात हो सके और क़ुदरत का करिश्मा देखिए कि खालू ने मेरी तरफ एक पर्चा बढ़ाते हुए कहा (वही जिन के घर में गया था किसी रिश्ते से खालू लगते थे हमारे) की शैरोज़ ये किसी कॉलेज का एड्रेस है क्या तुम्हें पता है कहां है ये मेरी भांजी आई हुई है पेपर देने इसका बोर्ड यहां पड़ा है, वो BA कर रही थी, मैने खुशी खुशी पर्चा देखा जिसमें उसका नाम मुझे मालूम हुआ (उसका नाम शीज़ा था) वो एड्रेस हमारे शहर के मशहूर कॉलेज "JDS डिग्री कॉलेज का था" जहां उसका सेंटर था खालू ने मुझे पूछा क्या तुम इसके पेपर दिल सकते हो लाना ले जाना कर सकते हो क्यों कि मेरा काम खराब होगा और अपने लड़के की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसे दिल्ली जाना है ।


मैंने कहा हां में कर सकता हूं , मेरे इतना कहते ही खालू ने जेब से कुछ पैसे निकले और मुझे देने लगे बाइक में पेट्रोल के लिए लेकिन मैने मना किया और वो पैसे नहीं लिए, उन्होंने बताया परसों से पेपर शुरू हैं। और कुछ वक्त बाद मैं वहां से आ गया । इन्तज़ार का लम्हा अब परसों तक का इंतजार बड़ा मुश्किल था, इतनी जल्दी दोबारा उनके घर जाना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था, पता नहीं क्यों लेकिन ऐसा पहली बार लग रहा था, नहीं पहले ऐसा कभी नहीं सोचा दिन में कई बार भी जाना नॉर्मल था मेरे लिए , ख़ैर मैं नहीं गया और इंतज़ार करने लगा परसों का , मैने घर तो सारी बात बता ही दी थी अम्मी थोड़ा समझा रहीं थीं मुझे की जवान लड़की है बला बला..... और अब्बू उनकी बातों पर मुस्कुरा रहे थे ख़ैर हम अपनी कहानी पर वापस लौटते हैं, और आज मैं उसे ले कर जाने वाला हूं मैं घर पहुंच गया बाइक लेकर और मैने देखा कि वो प्रॉपर पर्दे में थी कॉलेज जाने के लिए, मुझे अच्छा लगा उसे देख कर |


अब बाइक पर बैठती है और हम चल देते हैं, आपको बता दूं वो बाइक पर मुझे कम से कम एक बालिच का फैसला कर के बैठी थी उस वक्त मेरे पास हीरो स्प्लेंडर 100cc थी मैं उससे बात करना चाह रहा था लेकिन हिम्मत साथ नहीं दे रही थी, मैने रस्ते में कई बार कोशिश की कि मैं उससे कुछ पूंछ सकूं लेकिन न पूछ सका आखिर कार कॉलेज आ गया और जब वो कॉलेज की तरफ बढ़ी तो मैने हिम्मत करके कहा सुनो..... उसने मेरी बात सुनने का इशारा दिया, और मैंने कहा तुम्हारा नाम क्या है उसने अपना नाम बताया जो कि पहले से ही जनता था फिर मैंने कहा तुम मुझे वापस कहां ढूंढोगी? बात करके तो जाओ ऐसे ही जाने लगी तो वो रुक गई और कहा तुम यहीं आ जाना , मैंने कहा मेरा फोन नो. लेलो कॉल कर देना मुझे एग्जाम के बाद , मैने महसूस किया कि उसने हल्की हंसी के साथ कहा कि मेरे पास फोन नहीं है, बस फिर मैं क्या ही बोलता ?....मैं खामोश , फिर मैने कहा अच्छा ठीक है मैं अभी जा रहा हूं 2 घंटे बाद आजूंगा यही पर l और मैं वही पास में एक cafe में चला गया ।


2 घंटे बाद वापस गया और कुछ देर इंतज़ार के बाद वो आ गई, बाइक पर बैठी मैंने पूछा कैसा रहा पेपर तो जवाब मिला अच्छा रहा, फिर मैने हिम्मत करके कहा coffee पीने चलोगी ? उसने कहा मुझे घर छोड़ दें, लेकिन मेरे ज़्यादा कहने पर वो राज़ी हो गई, फिर मैंने उससे बात करना शुरू कर दिया मेरी आदत है थोड़ी मज़ाक मस्ती करने की, मैंने महसूस किया कि कुछ देर बाद वो मेरे साथ बात करने में इंटरेस्टेड हो गई उसे मेरे साथ अच्छा लगने लगा और मुझे तो लग ही रहा था, यूं मैंने उसे लाना लेना किया और तब अच्छी दोस्ती हो गई आखिरी दिन था मैंने सोचा अगर अब कुछ न कहा तो फिर कभी बात न हो सकेगी , क्यों कि वो घर चली जाएगी फोन उस पर था नहीं और मेरा कोई इतना खास रिश्ता नहीं उससे जो कभी मिल सकूं ।


मैं आज फिर उसी cafe में लेकर गया पेपर के बाद और मैंने देखा कि उसकी आंखों में भी बिछड़ने का डर नज़र आ रहा था लेकिन कहने की हिम्मत उसमें भी नहीं थी, लेकिन मैंने उसे पूछा अब तुम कब जाओगी घर उसने बताया कल पापा आ रहे हैं लेने को मैंने थोड़ा उदासी भरे लहजे में पूछा क्या हम कभी मिलेंगे दोबारा?.... ब-ज़हिर तो वो मुस्कुराई और बोली क्यों मिलना है ? लेकिन मैं जनता हूं उसके मन में भी यही सवाल था कि क्या हम मिलेंगे कभी, तो उसके इस सवाल पर मैंने कहा बस यूं ही मिलना है कोई खास बात तो नहीं, मैंने कहा अच्छा नहीं लग रहा तुम जाने वाली हो ये जानकार कितना अच्छा होता हम ऐसे ही साथ रहते, मैने देखा कि वो भी मेरी हां में हां मिलाना चाहती है लेकिन शायद किसी बात का डर है , या शायद उसे कुछ और वक्त चाहिए था इस बात के लिए फैसला करने में ।


और वो कुछ न बोली खामोश रही, तो मैने एक पर्चे पर अपना नंबर लिख कर दिया और कहा कभी मन करे तो बात कर लेना वो उसने ले लिया और अब माहौल थोड़ा sad sad सा होने लगा था तो मैने टॉपिक बदल दिया और मैं उससे पूछने लगा आगे क्या करने का इरादा है , बग़ैरा बग़ैरा बाते होती रहीं,फिर हम लोग वापस घर आ गए फिर वो घर चली गई और कुछ दिन बाद कॉल की मैं खुश हो गया, लेकिन उसने फोन किया तो बात कुछ और ही थी उसने बताया कि उसके लिए रिश्ता आया है सब को लड़का पसंद है अभी हां तो नहीं कि है लेकिन मुझे उम्मीद है घर वाले हां कर देंगे, लेकिन मैं वहां शादी नहीं करना चाहती हूं इतना इशारा मेरे लिए काफी था लेकिन मैने पूछा तो मुझे क्या करना चाहिए अब ? वो बोली मुझे नहीं पता क्या करोगे लेकिन मैं वहां शादी नहीं करना चाहती .... तो मैंने भी हंसते हुए पूछ लिया तो कहां करना चाहती हो ? तब उसने कहा कहीं नहीं, हां लेकिन मैं जानता था कि "कहीं नहीं" का मतलब मुझसे शादी करने का है ।


फिर मैने अम्मी से कह कर खालू से बात कराई कि उनकी भांजी का रिश्ता मुझे करवाएं , खालू ने बात करने के लिए हां तो कह दिया लेकिन उन्होंने बात करने में 2 दिन ले लिए उधर शीज़ा के पापा ने दूसरी जगह हां कर दी , अब उनका कहना था कि मैं अपनी बात खराब नहीं करूंगा हां कह दी तो कह दी लड़के में कोई ऐब नहीं है अच्छा कमाता है अच्छा दिखता है अच्छे घर का है मना किस बिना पर करूंगा ? बिल-आखिर उन्होंने अपनी बात खराब नहीं की हालांकि 3 ज़िंदगी ख़राब करने का उन्हें कोई मलाल या रंज नहीं, और इस तरह हमारी कहानी अधूरी रही, अब मेरी शादी कहीं और होने को है....

 निष्कर्ष

मेरे साथ जो हुआ अच्छा तो नहीं हुआ , लेकिन मेरी दरख्वास्त है जो भी इस कहानी को पढ़ रहे हैं उनसे की अपने बच्चों की मर्ज़ी जानने की कोशिश किया करो, किसी को ज़बान देने से पहले, ये सोचना गलत है कि "हम क्या अपनी औलाद का बुरा सोचेंगे" बिल्कुल आप अच्छा सोचेंगे आपकी नीयत पर बिल्कुल शक नहीं है मुझे लेकिन ऐसा मुमकिन है जो आप अपनी औलाद के लिए अच्छा कर रहे हैं वो उनके लिए बुरा साबित हो !